Friday, December 2, 2016

शिक्षा की शुरुआत, स्वयं को समझने से

एक क्लासरूम में अगर 40 बच्चे पढ़ते हैं तो बहुत सारे ऐसे गुण होंगे जो हर बच्चे में होंगे। कुछ आदतें, कुछ प्रतिक्रियाएं, सोचने का तरीका, मन में उठने वाले विचार...ऐसा ही बहुत कुछ। मुझे कोई किताब नहीं दिखती जो एक क्लास के सारे बच्चों की कॉमन क्वालिटीज को पहचानने में बच्चों की मदद करे।

क्या ऐसी किताब बन सकती है? क्या ऐसा पाठ्यक्रम बन सकता है? क्या यह पढ़ाया जा सकता है? बिलकुल हो सकता है। हर बच्चा यह अच्छे से पहचान सकता है कि मुझमें और सामने वाले बच्चे में क्या कॉमन है। लेकिन सामने वाले बच्चे को जानने से पहले उसे अपने बारे में जानना जरूरी है। इसलिए इसकी शुरुआत स्वयं की शिक्षा से करनी पड़ेगी।

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